संस्था को बिकी जमीन पर इस्लाम पटेल वाघेला ने कर ली रेशोडील: विवादास्पद प्रशांत सागर अपार्टमेंट का मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कनाड़िया रोड की जिस प्रशांत सागर अपार्टमेंट की जमीन पर कुख्यात भूमाफिया इस्लाम पटेल वाघेला ने रेशोडील की, उसे तो वो 1999 में ही हरियाणा हाउसिंग सोसायटी को बिकवा चुका था।
जिन किसानों ने ये जमीन संस्था को बेची, वो सभी उसके रिश्तेदार ही थे। बाद में ये मामला कोर्ट गया, जहां से संस्था को बिक्री वैध ठहराई गई थी।
फिर भी इस्लाम वाघेला ने अपार्टमेंट तनवाने की कोशिश की। अब इसमें फ्लैट खरीदने वाले अपनी जीवनभर की पूंजी इस्लाम की शातिर चालों के कारण गंवाकर अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहे हैं।
सौदा वाघेला ने पर्दे के पीछे रहकर करवाया: बेचने वालों में गुलाब पटेल, दाऊद पटेल, सत्तार पटेल आदि शामिल थे। सौदे के विक्रय लेख में लिखा है कि संस्था ने ये जमीन अपने आवासहीन सदस्यों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खरीदी है।
इस संस्था के सहकारी होने से विक्रय लेख स्टाम्प व पंजीयन शुल्क से मुक्त थी। इस सौदे का विक्रय लेख 12 दिसंबर 1999 को बना था। ये सौदा इस्लाम पटेल वाघेला ने पर्दे के पीछे रहकर करवाया था। यानी जिस जमीन पर प्रशांत सागर अपार्टमेंट आधा-अधूरा तना है उसकी जमीन पर इस्लाम पटेल वाघेला पहले ही हरियाणा संस्था को बिकवा चुका था।
28.16 एकड़ जमीन को रिश्तेदारों के नाम करवाया
हिंदू युवती को लव जिहाद में फंसाकर कुख्यात भूमाफिया इस्लाम पटेल वाघेला के बहू और बेटे अजहर की पत्नी अंजुम बी का हत्यारा (पिता मोहम्मद पटेल के अनुसार) है, की कारगुजारियों की सिलसिलेवार जानकारी पूरे प्रामाणिकता के साथ खुलासा फर्स्ट प्रकाशित कर रहा है।
इसी कड़ी में इस्लाम पटेल वाघेला की एक और कारगुजारी ये है कि उसने फर्जी बंटवारे के कागजातों के आधार पर हड़पी कनाड़िया रोड पर संचार नगर से लगी ग्राम खजराना की 28.16 एकड़ जमीन को अपने रिश्तेदारों के नाम करवा दिया था, जिन्होंंने 1999 में ही ये जमीन हरियाणा हाउसिंग सोसायटी को बेच दी थी।
धता बताने पर संस्था कोर्ट गई: इसके बाद उसने इस जमीन पर रिश्तेदारों और हरियाणा संस्था को धता बताकर कब्जा कर लिया, जिसके विरोध में संस्था कोर्ट गई।
हाई कोर्ट ने 17 अगस्त 2012 को स्टे ऑर्डर में मालिकाना हक वाले किसानों व हरियाणा संस्था को भी शामिल किया था।
इन पर लगाया केस: ये केस अब्बास पिता गुलाब पटेल, उसके बच्चे नजमा, आजाद, खातून बी, अनीशा, जुलेशा, सईदा ने यासीन पिता दाऊद, उसके भाई इस्लाम पटेल वाघेला, सागर बी, मलका बी, हमीदा बी, मम्मू पिता सत्तार पटेल, परिजन रशीदा, शहजाद, मुमताज बेगम, जैतून, फरीदा, बबीता आदि पर लगाया था।
कोर्ट ने संस्था के पक्ष में दिया था फैसला
इस्लाम की तमाम कारगुजारियों को दरकिनार करते कोर्ट ने संस्था के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन इस्लाम चुप नहीं बैठा और उसने इस जमीन पर कब्जा जमा लिया और फिर डेवलपर संजय आनंद से रेशोडील की और उन्हें सारी अनुमतियां दिखाईं।
टीएनसीपी, रेरा अप्रूवल और नगर निगम से बिल्डिंग परमिशन भी बताई। इस दौरान इस्लाम पटेल वाघेला ने बेहद शातिराना ढंग से इस जमीन को लेकर पूर्व से चल रहे कोर्ट केस की जानकारी को छिपा लिया।
संजय आनंद ने अनुमतियों पर भरोसा कर प्रशांत सागर अपार्टमेंट का निर्माण शुरू कर दिया, लेकिन जल्दी ही इस्लाम की कारगुजारियों की कलई खुल गई और कोर्ट केस का मामला सामने आ गया। इस पर आनंद ने काम बंद कर दिया।
तब से ये प्रशांत सागर अपार्टमेंट अधूरा पड़ा है। इसके छह ब्लॉक बनने थे, जिनमें से तीन ही बने थे। इन ब्लॉकों के फ्लैट लोगों को इस्लाम ने स्कूटर, फ्रीज, टीवी देने का लालच देकर बेचे।
कुछेक को अलाॅट हो गए, जबकि बाकी ने पैसा तो जमा करा दिया लेकिन फ्लैट नहीं मिले। वो आज भी अपनी जीवनभर की कमाई के पैसों को या तो वापस देने या फ्लैट देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस्लाम अपनी जेबें भरकर चुप्पी साध गया है। खरीदार बेचारे इधर-उधर भटक रहे हैं।
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