पश्चिमी रिंग रोड, मांग पूरी नहीं तो काम नहीं: किसान फिर सड़क पर; करणी सेना भी साथ
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रशासन और एनएचएआई को 10 दिन का अल्टीमेटम
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आउटर बायपास यानी नया पश्चिमी रिंग रोड और इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड परियोजना को लेकर प्रभावित किसानों का आंदोलन फिर तेज हो गया है। उनका कहना है आंदोलन दूसरी बार करना पड़ रहा है, क्योंकि प्रशासन के साथ समझौते के बावजूद सड़क निर्माण से जुडे विभागों और प्रशासन ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया। प्रभावित किसानों में बढ़ता असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
गुरुवार को हातोद में करणी सेना परिवार, पश्चिम रिंग रोड एवं ग्रीन फील्ड संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए। किसानों ने ‘मांग पूरी नहीं तो काम नहीं’ और ‘हमारी भूमि, हमारा अधिकार’ जैसे नारों के साथ प्रदर्शन कर प्रशासन को 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा और 10 दिन का अल्टीमेटम दिया।
आंदोलन से जुड़े किसान नेताओं ऋषि राज सिंह, अनिल व्यास, नरेंद्रसिंह चावड़ा का कहना है पहले शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने रखी थीं।
सड़क निर्माण के दौरान सर्विस रोड, सिंचाई व्यवस्था, खेतों तक पहुंच, मुआवजा और भूमिहीन होने वाले परिवारों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी, लेकिन समाधान नजर नहीं आया।
किसानों का आरोप है विभागीय अधिकारी केवल निर्माण को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि प्रभावित परिवारों की आजीविका और भविष्य की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
किसानों ने कहा पश्चिमी रिंग रोड जैसी बड़ी परियोजनाओं में विकास के साथ मानवीय और कृषि हितों का संतुलन जरूरी है। लगातार कृषि भूमि अधिग्रहित होने से खेती का दायरा घट रहा है और कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो रहा है। समय रहते संवाद और समाधान नहीं हुआ तो यह असंतोष और व्यापक हो सकता है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने नई गाइड लाइन के अनुसार चार गुना मुआवजा, दोनों ओर पक्की डामर सर्विस रोड, भूमिहीन किसानों के लिए आर्थिक पैकेज, अघोषित बिजली कटौती पर रोक, खाद वितरण की पुरानी व्यवस्था बहाल करने, डीपीआर सार्वजनिक करने और काटे गए पेड़ों के प्रत्यारोपण की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा आंदोलन विकास के विरोध में नहीं, बल्कि ‘किसानों को साथ लेकर विकास’ को लेकर है। 10 दिन में ठोस निर्णय नहीं हुआ तो रोड निर्माण रुकवाकर हाई-वे पर चक्काजाम किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंदोलन अब केवल मुआवजे का मुद्दा नहीं, बल्कि खेती, जमीन और किसान अस्तित्व से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
भूमिहीन किसानों के लिए विशेष पैकेज... जिन किसानों की पूरी जमीन परियोजना में जा रही है, उन्हें आजीविका चलाने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और पुनर्वास सुविधा दी जाए। सड़क निर्माण के दौरान खेतों तक पहुंच, पाइपलाइन और जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रमुख मांगें
सड़क का काम शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई। डीपीआर सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता रहे।
निर्माण के लिए काटे गए पेड़ों को कहां और किस स्थिति में प्रत्यारोपित किया गया है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि का नई गाइड लाइन के अनुसार चार गुना मुआवजा दिया जाए।
हाई-वे के दोनों तरफ किसानों और ग्रामीणों की आवाजाही के लिए डामरयुक्त सर्विस रोड बनाई जाए।
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