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अवैध विज्ञापन बोर्डों-होिर्डंग्स के मास्टरमाइंड हैं राहुल और प्रवीण: अधिकारियों से सेटिंग करते हैं; पूरे शहर में बिछा है इनका जाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 अप्रैल 2026, 1:34 pm
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अवैध विज्ञापन बोर्डों-होिर्डंग्स के मास्टरमाइंड हैं राहुल और प्रवीण

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहरभर में लगने वाले विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग्स, यूनिपोल्स आदि अवैध रूप से लगाने के पीछे राहुल और प्रवीण नामक युवकों के नाम सामने आए हैं। यही इस बड़े घोटाले के मास्टरमाइंड हैं।

अधिकारियों से सेटिंग से लेकर स्थान का चयन तक ये दोनों करते हैं। हाल ही में विजय नगर से बापट चौराहा के बीच जब विज्ञापन बोर्ड और होर्डिंग्स घोटाला पकड़ाया तो ये दो नाम सामने आए।

सूत्रों ने बताया कि राहुल और प्रवीण शहरभर में लगे अवैध विज्ञापन बोर्ड- होर्डिंग्स और यूनिपोल्स आदि लगाने के लिए स्थान के चयन से लेकर अधिकारियों से सेटिंग तक सारे काम करते हैं और इस तरह अधिकारियों से साठगांठ करके नगर निगम को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि इनकी जानकारी निगम में कई अधिकारियों को है, लेकिन वे चुप्पी साधे बैठ गए हैं और इन दोनों का खेल खुलकर चल रहा है। शहरभर में लगे अवैध विज्ञापन बोर्डों और होर्डिंग्स के अलावा यूनिपोल्स अवैध रूप से बिना अनुमति और बिना निगम को टैक्स चुकाए लगवाने का ठेका ये दोनों लेते हैं।

अधिकारियों से सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ये जब चाहे, जहां चाहे, जैसा चाहे विज्ञापन बोर्ड लगवा लेते हैं और अधिकारी जेब गरम होने के बाद इनकी ओर झांकता भी नहीं।

निगम के मार्केट विभाग में इनकी तूती बोलती है। इस विभाग में जो भी अधिकारी रहा वो इन पर अंगुली नहीं उठा सका। नतीजा ये कि इन दोनों ने अपनी जेब गर्म करने के लिए न केवल पूरे शहर को बदरंग बना दिया है, बल्कि निगम को भी खासा चूना लगाया है। बड़ी बात ये है कि ये काम आज से नहीं, वर्षों से चल रहा है और ये दोनों मिलकर करोड़ों का खेल कर चुके हैं।

एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने पकड़ा था घोटाला- उल्लेखनीय है कि 30 मार्च को एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने विजय नगर चौराहा से बापट चौराहा तक ऐसा घोटाला पकड़ा था। उन्होंने पाया कि करीब 20 विज्ञापन बोर्ड और होर्डिंग्स पिलरों के बीच लगे हैं।

अधिकारियों से पूछा तो कोई भी अधिकारी ठोस जवाब नहीं दे पाया। प्रभारी एमआईसी सदस्य राकेश जैन को भी पता नहीं था कि इंदौर में ही विज्ञापन बोर्ड-होर्डिंग्स का घोटाला उनकी नाक के नीचे हो गया है। ये तथ्य भी सामने आया कि ये विज्ञापन बोर्ड- होर्डिंग्स जिस एडवरटाइजिंग कंपनी के हैं, उसे 2019 में टेंडर दिया गया, जो 5 साल का था और वो 2024 को खत्म हो गया।

अधिकारियों का अजीबोगरीब जवाब था कि कोरोना काल में कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए उसे और वक्त दिया गया है, लेकिन किसी अधिकारी के पास ये जवाब नहीं था कि ये वक्त कितना है? विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक ली तो ये जानकर चौंक गए कि इंदौर में ऐसा घोटाला हो गया है।

उन्होंने कहा कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे। अब उनसे यही अपेक्षा की जा सकती है कि वे नगर निगम की साख और खजाने पर कुंडली मारकर बैठे इन दोनों दलालों राहुल और प्रवीण पर कार्रवाई करवाएं ताकि ऐसे घोटाले पर अंकुश लग सके।

ये हुआ था मंत्री की बैठक में
विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले दिनों अधिकारियों की बैठक ली थी, जिसमें उनके सामने यह मामला आया। वे ये जानकर हतप्रभ रह गए। उन्होंने अधिकारियों से अवैध विज्ञापन बोर्डों के बारे में पूछा तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

इस पर वे नाराज हुए और बाद में कहा कि वे इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे। कुछ दिनों पूर्व ही ये जानकारी सामने आई थी कि बीआरटीएस पर कंपनी का ठेका खत्म होने के बावजूद नौलखा, भंवरकुआं, सहित विभिन्न मार्गों पर अवैध रूप से यूनीपोल और विज्ञापन बोर्ड लगे हुए हैं। आश्चर्य की बात ये है कि इस घोटाले की जानकारी मार्केट विभाग अमले और अपर आयुक्त आकाश सिंह को भी नहीं थी।

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