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प्रदेश के इस जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की दयनीय हालत: एक वर्ष में इतनी महिलाओं की प्रसव संबंधी कारणों से मौत; गंभीर सवालों के बीच गहराई चिंता

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 मई 2026, 5:06 pm
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प्रदेश के इस जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की दयनीय हालत

खुलासा फर्स्ट, भोपाल/सीधी।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बीते एक वर्ष के दौरान 53 महिलाओं की प्रसव संबंधी कारणों से हुई मौतों ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR) में लगातार सुधार के दावों के बीच सीधी जिले के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंताओं को बढ़ा दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करना पड़ा।

अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिले में 53 महिलाओं की गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के बाद जटिलताओं के कारण मौत हुई। इनमें अधिकांश महिलाओं की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी और औसत आयु केवल 26 वर्ष रही। सबसे कम उम्र की मृतका 19 वर्ष की थी।

लगातार चेतावनी के बावजूद नहीं हुआ सुधार
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सीधी जिले में बढ़ती मातृ मृत्यु दर को लेकर कई बार पत्र, फोन कॉल, व्हाट्सएप संदेश और समीक्षा बैठकों के माध्यम से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क किया गया था। इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

भारत में जहां मातृ मृत्यु दर घटकर 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म तक पहुंच गई है, वहीं मध्य प्रदेश में यह दर 159 है। इसके विपरीत सीधी जिले की मातृ मृत्यु दर 211 दर्ज की गई, जो राज्य के औसत से काफी अधिक है।

मौतों के आंकड़े चौंकाने वाले
जांच में सामने आया कि 53 मौतों में से- 16 महिलाओं की मौत रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में हुई। 13 महिलाओं ने अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में दम तोड़ दिया। 13 महिलाओं की घर पर ही मौत हो गई। 5 मौतें सीधी जिला अस्पताल में हुईं। 4 महिलाओं की मौत निजी अस्पतालों में हुई। दो अन्य मौतें रीवा के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में दर्ज की गईं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि बड़ी संख्या में मौतें ऐसी थीं जिन्हें समय पर इलाज और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से रोका जा सकता था।

किन कारणों से गई महिलाओं की जान?
40 मामलों की जांच में सामने आए प्रमुख कारणों में शामिल हैं- अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) – 12 मौतें, हाई ब्लड प्रेशर और एक्लेम्पसिया – 7 मौतें, गंभीर एनीमिया – 5 मौतें, आयरन और फोलिक एसिड की कमी – 16 मामले, संक्रमण और सेप्सिस – 4 मौतें और गर्भपात से जुड़ी जटिलताएं – 3 मौतें। इसके अलावा एक महिला की सांप के काटने से और दूसरी की आत्महत्या से मौत हुई। वहीं 13 मामलों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी भी लंबित है।

जिला अस्पताल में संसाधनों का गंभीर संकट
सीधी जिला अस्पताल की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अस्पताल में प्रसूति सेवाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच अस्पताल में 10,022 महिलाओं को भर्ती किया गया। 5,922 प्रसव हुए। केवल 726 सी-सेक्शन किए जा सके। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सी-सेक्शन की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक बड़ा कारण विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

अस्पताल में केवल एक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट होने के कारण रात के समय गंभीर मामलों को संभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अस्पताल को मिले 1,109 रेफरल मामलों में से 492 मरीजों को बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ा, जिनमें से अधिकांश को रीवा रेफर किया गया।

डॉक्टर और नर्सों की भारी कमी
जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञों के चार स्वीकृत पद हैं, लेकिन सभी पदों पर नियुक्तियां नहीं हैं। मैटरनिटी वार्ड में जहां लगभग 40 कर्मचारियों की आवश्यकता है, वहां केवल 22 कर्मचारी कार्यरत हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार- अलग ऑपरेशन थिएटर का अभाव है। पर्याप्त ब्लड स्टोरेज उपलब्ध नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। अतिरिक्त एनेस्थीसियोलॉजिस्ट नहीं हैं। वेंटिलेटर और क्रिटिकल केयर सुविधाएं सीमित हैं। अप्रैल महीने में ब्लड बैंक में मात्र 7 यूनिट रक्त उपलब्ध था। बाद में विशेष रक्तदान शिविरों के माध्यम से 53 यूनिट रक्त की व्यवस्था की गई।

गांवों में और खराब हालात
जिले के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। रामपुर नैकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में निर्धारित स्टाफ से कम कर्मचारी कार्यरत हैं। ब्लड स्टोरेज यूनिट तो है, लेकिन रक्त चढ़ाने की सुविधा नहीं है। इसके चलते गंभीर गर्भवती महिलाओं को रीवा रेफर करना पड़ता है, जो करीब डेढ़ घंटे की दूरी पर स्थित है।

जननी वाहन चालकों के अनुसार बारिश के मौसम में कई गांवों का संपर्क कट जाता है और कई बार गर्भवती महिलाओं को खाट पर उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। सिहावल स्वास्थ्य केंद्र में भी हाई ब्लड प्रेशर और प्रसव के दौरान रक्तस्राव रोकने वाली जरूरी दवाओं की कमी बताई गई है। यहां तीन में से दो डिलीवरी टेबल खराब हैं और स्थायी डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं।

स्वास्थ्य विभाग की नाराजगी, सिविल सर्जन को नोटिस
दिसंबर 2025 में रीवा में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद सीधी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में अस्पताल प्रबंधन, प्रसव संबंधी निर्णयों, अधूरी तैयारियों और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी का उल्लेख किया गया।

हालांकि डॉ. खरे का कहना है कि अस्पताल लगातार हाई-रिस्क गर्भावस्थाओं की पहचान, एनीमिया नियंत्रण और ब्लड बैंक की स्थिति सुधारने के प्रयास कर रहा है। उनका यह भी दावा है कि कई गंभीर मामले अन्य जिलों से भी रेफर होकर आए थे।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सीधी जिले के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जमीनी स्तर पर अभी भी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता, समय पर इलाज, रक्त की व्यवस्था, सुरक्षित प्रसव और मजबूत रेफरल सिस्टम सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

53 माताओं की मौत का यह आंकड़ा केवल एक जिले की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की उन कमजोरियों को उजागर करता है जिन्हें समय रहते दूर करना बेहद जरूरी है। यदि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ तो मातृ मृत्यु दर कम करने के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

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