युद्ध का सीधा असर बाजार पर: इस देश से सूखे मेवे आना बंद; महंगाई तेज, ट्रांसपोर्ट से लेकर उद्योग तक दबाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर। इंदौर।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब बाजार और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान–अमेरिका के बीच युद्ध, बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सबसे बड़ा असर सूखे मेवों (ड्राय फ्रूट्स) पर पड़ा है, जिनकी आवक लगभग थम गई है और कीमतें अचानक बढ़ गई हैं।
सूखे मेवों की सप्लाई ठप, दाम आसमान पर
व्यापारियों के अनुसार, ईरान से आने वाले पिस्ता, बादाम और अन्य ड्राय फ्रूट्स की सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में है। सीमित स्टॉक के चलते बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। खासतौर पर ईरानी पिस्ता 2500 रुपए किलो तक पहुंच गया है, जिससे त्योहारों और रोजमर्रा की खपत दोनों प्रभावित हो रही हैं।
तेल महंगा, ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ी
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने पूरे बाजार का गणित बिगाड़ दिया है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी आई है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ा है। इंदौर में माल ढुलाई महंगी होने से व्यापारियों की लागत बढ़ गई है और इसका बोझ अब उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।
आयात-निर्यात पर असर, ऑर्डर अटके
मिडिल ईस्ट के व्यापारिक मार्गों में बाधा आने से आयात-निर्यात दोनों प्रभावित हुए हैं। कपड़ा, मशीनरी और केमिकल सेक्टर में देरी और लागत बढ़ने की समस्या सामने आ रही है। व्यापारियों को ऑर्डर में देरी, कैंसिलेशन और पेमेंट अटकने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
निर्यात पर भी दबाव
इंदौर और पीथमपुर का निर्यात कारोबार हजारों करोड़ का है। अकेले पीथमपुर से पिछले वित्त वर्ष में 17,850 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ था। हालिया हालात के बाद निर्यात ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उद्योगों की गति धीमी पड़ने लगी है।
5,000 से ज्यादा उद्योग प्रभावित
कच्चे माल की उपलब्धता पर असर पड़ने से इंदौर की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की लागत बढ़ गई है। एल्यूमिनियम, गैस और अन्य औद्योगिक संसाधनों की सप्लाई बाधित होने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में 5,000 से अधिक उद्योगों पर इसका असर देखने को मिल रहा है।
महंगाई का ‘ट्रिपल अटैक’
इस वैश्विक संकट का असर तीन स्तर पर दिख रहा है-1. ट्रांसपोर्ट:
माल ढुलाई महंगी होने से हर छोटी-बड़ी वस्तु के दाम बढ़ने लगे हैं।
2. खेती:
फर्टिलाइजर खासकर यूरिया उत्पादन महंगा होने से कृषि लागत बढ़ रही है, जिससे अनाज महंगा हो सकता है।
3. मैन्युफैक्चरिंग:
ईंधन महंगा होने से फैक्ट्रियों की लागत बढ़ गई है। लोहा, स्टील, सीमेंट और केमिकल उद्योगों में उत्पादन महंगा हो रहा है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं।
बाजार में बढ़ते दाम (प्रति किलो/लीटर अनुमानित)
मूंगफली तेल: ₹210
सोयाबीन तेल: ₹180
सरसों तेल: ₹190
चना दाल: ₹110
तुअर दाल: ₹145
बासमती चावल: ₹95
ईरानी पिस्ता: ₹2500
कच्चे माल में तेज उछाल
कॉपर रिंग्स: +17.1%
एल्युमिनियम पाउडर: +17.5%
पीतल: +24.1%
कॉपर वायर: +20.7%
लूज तेल: +30%
आगे और बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है, तो महंगाई और तेज हो सकती है।कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय संकट का असर अब स्थानीय बाजार तक पहुंच चुका है। जहां सूखे मेवे से लेकर रोजमर्रा के सामान तक, हर चीज महंगी होने लगी है और आने वाले समय में इसका दबाव और बढ़ सकता है।
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