वीडियो देखिये, एक तरफ शहर जूझ रहा भीषण जल संकट से: दूसरी ओर मंत्री के बंगले में पानी का ऐसा दुरुपयोग; कांग्रेस ने साधा निशाना, लगाए ऐसे आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक ओर इंदौर शहर के कई इलाकों में लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के सरकारी बंगले में पेयजल टैंकर से बगीचे की सिंचाई किए जाने का मामला चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार शहर के कई मोहल्लों और बस्तियों में इन दिनों पानी की गंभीर किल्लत बनी हुई है। कई क्षेत्रों में लोगों को पानी के टैंकरों का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। जैसे ही टैंकर पहुंचते हैं, बड़ी संख्या में लोग बर्तन और डिब्बे लेकर पानी भरने के लिए कतारों में खड़े नजर आते हैं।
पानी के लिए परेशान रहवासी
शहर के अनेक इलाकों में नियमित जलापूर्ति प्रभावित होने के कारण लोगों को निजी टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि पहले जो निजी टैंकर 600 रुपये में उपलब्ध हो जाते थे, अब उनके लिए 1,000 से 1,200 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए स्थिति और अधिक कठिन बनी हुई है। कई परिवारों को दो-दो और तीन-तीन दिन तक पानी का इंतजार करना पड़ रहा है।
मंत्री के बंगले का वीडियो चर्चा में
इसी बीच रेसीडेंसी क्षेत्र स्थित मंत्री तुलसीराम सिलावट के सरकारी बंगले से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में कथित तौर पर 12 हजार लीटर क्षमता वाले पेयजल टैंकर से मोटर के माध्यम से बगीचे में पेड़-पौधों को पानी देते हुए दिखाया गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह प्रक्रिया पिछले कई दिनों से नियमित रूप से चल रही थी, लेकिन अब इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
नगर निगम के निर्देशों पर उठे सवाल
गौरतलब है कि हाल ही में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर में जल संकट को देखते हुए पेड़-पौधों की सिंचाई और निर्माण कार्यों के लिए ट्रीटेड वॉटर (शोधित जल) के उपयोग के निर्देश दिए थे। नगर निगम के जल यंत्रालय विभाग को भी इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए थे। ऐसे में यदि पेयजल का उपयोग बगीचों की सिंचाई के लिए किया जा रहा है तो यह नगर निगम की नीति और जल संरक्षण के प्रयासों के विपरीत माना जा रहा है।
रेसीडेंसी क्षेत्र में जल आपूर्ति की व्यवस्था
सूत्रों के अनुसार रेसीडेंसी क्षेत्र स्थित शासकीय बंगलों में नियमित नर्मदा जल की आपूर्ति की जाती है। जिन स्थानों पर पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पाता, वहां टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है।
जानकारों का कहना है कि कई स्थानों पर बगीचों की सिंचाई के लिए पेयजल टैंकरों का उपयोग किया जाता है। हालांकि ट्रीटेड वॉटर उपलब्ध होने के बावजूद उसका सीमित उपयोग किए जाने की बात भी सामने आती रही है।
राजनीतिक बहस तेज
मामला सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि जब शहर के आम नागरिक पेयजल संकट से जूझ रहे हों, तब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के परिसरों में पेयजल का उपयोग बगीचों की सिंचाई के लिए किया जाना उचित नहीं है। हालांकि इस मामले में संबंधित विभाग या मंत्री की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जल संकट बना बड़ी चुनौती
इंदौर में बढ़ती गर्मी और जल स्रोतों पर दबाव के कारण जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई इलाकों में जल वितरण व्यवस्था प्रभावित है, जबकि नागरिक नियमित जलापूर्ति की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में पेयजल के उपयोग को लेकर सामने आए विवाद ने जल प्रबंधन, संसाधनों के समान वितरण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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