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वंदे मातरम नहीं गाने पर अड़ी पार्षद फौजिया शेख को सदन से कर दिया गया निष्कासित: हंगामेदार रहा निगम का बजट सम्मेलन

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संवाददाता

09 अप्रैल 2026, 5:31 pm
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वंदे मातरम नहीं गाने पर अड़ी पार्षद फौजिया शेख को सदन से कर दिया गया निष्कासित

‘देशभक्ति आदेश नहीं, एहसास है’

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम का दो दिनी बजट सम्मेलन हंगामेदार रहा। इसके दूसरे दिन वंदे मातरम गाने से ही हंगामे की शुरुआत हो गई। जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने गाने से मना कर दिया तो नाराज सभापति मुन्नालाल यादव ने उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया।

इसके बाद देर तक हंगामा मचता रहा। बाद में सदन की कार्रवाई शुरू हुई और सभापति ने प्रश्नकाल शुरू किया तो भाजपाई और कांग्रेसी फिर हंगामा करने लगे। इससे कार्रवाई प्रभावित हुई।

हंगामा थमते ही कांग्रेसी पार्षद प्रश्नों के जवाब सदन में ही मांगने पर अड़ गए, जिससे फिर हंगामा शुरू हो गया। इस तरह निगम का बजट सम्मेलन हंगामेदार रहा। अंत में सभापति ने हंगामे के बीच ही बहुमत के आधार पर बजट के सभी प्रस्ताव पास कर दिए।

नगर निगम का दो दिनी बजट सम्मेलन पूरी तरह से भाजपा और कांग्रेसियों के हंगामे की भेंट चढ़ गया। पहले दिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव के भाषण में ही हंगामा होने के बाद दूसरे दिन सम्मेलन में प्रस्तावों पर चर्चा की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन दूसरे दिन का सम्मेलन शुरू होते ही वंदे मातरम गीत नहीं गाने की बात पर कांग्रेसी पार्षद फौजिया शेख अड़ गई, जिससे सदन में हंगामा होने लगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सभापति मुन्ना लाल यादव ने पार्षद को सदन से निष्कासित कर दिया, हालांकि बाद में कांग्रेसियों ने भी अपनी पार्षद की इस करतूत से पल्ला झाड़ लिया।

अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए
कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने प्रश्नकाल में पूछा कि निगम की शहर में कहां कितनी जमीन है इसकी जानकारी निगम अधिकारियों को नहीं है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

कांग्रेसी पार्षद के प्रश्न पर एमआईसी सदस्य राजेश उदावत ने कहा कि निगम के पास पूरी जानकारी है, आपको लिखित में दे दी जाएगी, लेकिन पार्षद मौके पर ही जानकारी देने की बात पर अड़ गए।

इसके बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव को मामले में हस्तक्षेप कर पंद्रह दिन में जानकारी देने की बात कहना पड़ी। इसके बाद भी बहस व हंगामा हुआ तो सभापति ने पंद्रह दिन में लिखित जानकारी देने का निर्देश दिए।

सभापति की इस व्यवस्था पर भी निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे भड़क गए और कहने लगे कि सभापति वही कह रहे हैं जो महापौर ने कहा है। इसके बाद फिर सदन में हंगामा शुरू हो गया।

कांग्रेसी गुंडे कहने पर हुआ हंगामा
सदन की कार्रवाई के दौरान जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने कांग्रेसी गुंडे कह दिया तो कांग्रेसी हंगामा करने लगे। मामला इतना गहराया कि कांग्रेसी पार्षदों ने सभापति की आसंदी घेर ली।

कांगेसियों के आसंदी घेरते ही भाजपाई भी सभापति की आसंदी के पास पहुंच गए। इससे मामला पेचीदा बन गया। देर तक हंगामे के हालात बने रहे। इसके बाद मामला जैसे-तैसे शांत हुआ।

साथ नहीं दिया तो कांग्रेस छोड़ दूंगी
फौजिया शेख सदन से निष्कासित होने के बाद कांग्रेसी पार्षदों पर जमकर भड़की। उनसे जब पूछा कि आपकी शिकायत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से की जाएगी तो वह कहने लगी कि मैंने कांग्रेस पार्टी से कोई अनुबंध नहीं किया है। कांग्रेसी मेरा साथ नहीं देंगे तो मैं कांग्रेस छोड़ दूंगी और औवेसी की पार्टी में शामिल हो जाऊंगी। इस तरह कांग्रेसी नेता दो खेमों में बंट गए।

‘वंदे मातरम’ को लेकर गुंडागर्दी
कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने कहा कि बीजेपी पार्षदों का कहना है कि यहां रहना है तो ‘वंदे मातरम’ कहना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम के नाम पर गुंडागर्दी की जा रही थी और माहौल दबाव बनाने वाला था। कुरान ‘वंदे मातरम’ गाने की इजाजत नहीं देती है, इसलिए इसे लेकर जबरदस्ती करना गलत है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने खामेनेई को धोखे से शहीद किया। इस मुद्दे को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। अगर विरोध किया जा रहा है, तो फिर ईरान से तेल और गैस क्यों ली जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में ही कुएं खोदकर यहीं से तेल-गैस निकाला जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ मुस्लिमों को टारगेट कर कार्रवाई की जाती है और उनकी दुकानों को तोड़ा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में अध्यक्ष चुप रहते हैं और कोई कार्रवाई नहीं करते।

जिस देश का अन्न-जल लेते हैं, उसका सम्मान न होना दुर्भाग्यपूर्ण
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी गुलामी की मानसिकता वाले लोग वंदे मातरम का विरोध कर रहे हैं। फौजिया शेख अलीम द्वारा वंदे मातरम नहीं गाना दुर्भायपूर्ण है।

हम उनकी पार्षदी को लेकर कानूनी पहलुओं पर चर्चा करेंगे। महापौर ने कहा कि जिस देश का अन्न-जल लेते हैं, उसका सम्मान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ईरान के नेता को श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन भारत माता की जय बोलने में पेट दर्द होता है।

मैंने पार्टी को नहीं छोड़ा: भाजपा से निष्कासित पार्षद जीतू यादव ने कहा कि मुझे पार्टी ने निकाला है मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है। मैं अब तक भाजपा की रीति और नीति के अनुरुप कार्य करता हूं। मैं शुरू से ही भाजपा का रहा हूं, आगे भी रहूंगा।

सदस्यों के प्रश्न सूची से गायब
नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इस मामले की शिकायत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से करने की बात कह दी। इसके बाद भी सदन में देर तक हंगामा मचता रहा, बाद में जैसे-तैसे सदन की कार्रवाई शुरू हुई तो सभापति ने प्रश्नकाल का समय शुरू करते हुए कांग्रेस पार्षदों को एक घंटे का समय दिया, लेकिन प्रश्नकाल शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने प्रश्न की सूची में कई पार्षदों के प्रश्न शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति जताते हुए सभापति से कहा कि यह प्रश्न आपकी सहमति से जोड़े गए हैं या महापौर की।

कई सदस्यों के प्रश्न सूची से गायब हैं। नेता प्रतिपक्ष की इस आपत्ति पर भाजपा पार्षदों ने हंगामा करते हुए कहा कि यह सभापति के अधिकार क्षेत्र का मामला है। जानबूझकर कांग्रेसी सभापति का अपमान कर रहे हैं। प्रश्नकाल के लिए तैयार की गई सूची सभापति ने तैयार कराई है। इसके बाद देर तक हंगामा मचता रहा।

जय-जय सियाराम
नगर निगम के अटल सदन में निगम बजट सम्मेलन के दूसरे दिन भाजपाई और कांग्रेसी एक-दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगाते रहे। इसके चलते सदन में जय-जय सियाराम के नारे लगते रहे। सदन में दोनों ओर से देर तक नारेबाजी की गई। इससे सदन की कार्रवाई अटकी रही।

इस तरह प्रश्नकाल में भी कई कांग्रेसी पार्षद अपने प्रश्न को लेकर सभापति से व्यवस्था की मांग करते रहे। लेकिन सदन में जय-जय सियाराम सहित कई तरह के नारे जमकर गूंजते रहे। सम्मेलन में पहले दिन भागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था।

दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगों’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।

दंगों की बात
निगम के बजट सम्मेलन में भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए देश में होने वाले सिख दंगों का मामला भी उठा दिया। वहीं एक मामले में कांग्रेसी पार्षद ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी, जिससे हंगामा थमने की बजाय और भड़क गया बाद में कांग्रेसी पार्षद राजू भदौरिया को माफी मांगनी पड़ी।

वंदे मातरम पर भड़के हिंदूवादी, पहुंचे थाने
नगर निगम के बजट सत्र के दौरान वंदे मातरम गाने को लेकर खड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर इस बयान ने जहां राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। वहीं, इस मामले में हिंदूवादी भी कूद चुके हैं। कल एमजी रोड थाने पहुंचे हिंदूवादियों ने शिकायती आवेदन देकर बयान देने वाली फौजिया शेख अलीम पर केस दर्ज करने की मांग की है।

मामले ने शहर की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि कल इंदौर नगर निगम परिषद की बैठक के समापन के दौरान वंदे मातरम गाने को लेकर विवाद हो गया।

कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल ने राष्ट्र गीत गाने से इनकार कर दिया। सभापति के निर्देश पर फौजिया शेख ने सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें वह एक्ट दिखाया जाए, जिसमें वंदे मातरम गाना अनिवार्य बताया गया हो।

इस पर भाजपा पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। वहीं, बैठक खत्म होने के बाद रुबीना इकबाल ने मीडिया से कहा था कि दादागीरी हम किसी की नहीं सुनते।

हमसे जबरदस्ती कुछ नहीं कराया जा सकता। भाजपा पार्षदों ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की भावनाओं से जोड़ते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। कहना था कि राष्ट्रगीत का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले में केस दर्ज कराया जाएगा। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सभापति से चर्चा कर आगे की कार्रवाई की बात कही थी।

इधर, विवाद बढ़ने के बाद हिंदूवादी नेता लक्की मेवाती अपने साथियों के साथ एमजी रोड थाने पहुंचे। उनके साथ मानसिंह राजावत और ऐश्वर्य शर्मा भी मौजूद थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परिषद में पार्षद फौजिया शेख अलीम ने राष्ट्र गीत गाने से इनकार कर देशभक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है और यह कृत्य समाज में विभाजन पैदा कर सकता है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि दोनों महिला कांग्रेस पार्षदों के बयानों से उनकी मंशा स्पष्ट होती है। उन्होंने जानबूझकर विवाद पैदा किया। फिलहाल पुलिस ने आवेदन लेकर जांच शुरू कर दी है।

वंदे मातरम् पर सियासत गरम, डॉ. सूरी का तीखा बयान
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के भीतर ही सियासी घमासान तेज हो गया है। इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के विवादित बयान पर अब पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अमीनुल खान सूरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘तानाशाही मानसिकता’ करार दिया है।

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी डॉ. सूरी ने इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें कहा गया था कि ‘जिसे वंदे मातरम् नहीं गाना, वो कांग्रेस के कार्यक्रमों में न आए।

’ डॉ. सूरी ने साफ शब्दों में कहा कि यह बयान न केवल अनुचित है, बल्कि कांग्रेस की मूल विचारधारा के भी खिलाफ है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में 1896 से वंदे मातरम् का विशेष स्थान रहा है और इसे हर अधिवेशन में गाया जाता रहा है, लेकिन कभी इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया।

इतिहास और भावना का सवाल
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का देश की आजादी और स्वतंत्रता संग्राम से गहरा रिश्ता रहा है। इसी नारे के साथ स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया और बलिदान दिए। लेकिन सूरी के मुताबिक, ‘देशभक्ति दिल से होती है, इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता। हर भारतीय वंदे मातरम् का सम्मान करता है, लेकिन इसे अनिवार्य करना उस भावना को कमजोर करता है।’

समावेशी सोच पर चोट : डॉ. सूरी ने आगे कहा कि इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान कांग्रेस की समावेशी और उदार सोच के विपरीत है, जिस पर पार्टी की नींव रखी गई है। उन्होंने दो टूक कहा, ‘हम वंदे मातरम् का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना गलत है।

देशभक्ति कोई आदेश नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक एहसास है।’ वंदे मातरम् को लेकर उठा यह विवाद अब कांग्रेस के भीतर वैचारिक बहस का रूप लेता दिख रहा है, जहां ‘अनिवार्यता बनाम भावना’ का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

कांग्रेस के हर कार्यक्रम में होगा वंदे मातरम, जिसे न गाना हो, वो न आए: चौकसे
शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा है कि अब कांग्रेस की हर मीटिंग की शुरुआत में वंदे मातरम गाया जाएगा। जिन्हें नहीं गाना हो वह मीटिंग में न आएं। उन्होंने कल निगम परिषद सम्मेलन में दो महिला पार्षदों के बयानों से पार्टी से अलग कर लिया।

चौकसे ने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के रूप में वंदे मातरम और जनगणमन को अपनाने का काम कांग्रेस ने ही किया था। आजादी के पहले कांग्रेस के हर सम्मेलन में वंदे मातरम का गान होता था। कांग्रेस की छोटी से छोटी बैठक भी वंदे मातरम के उद्घोष के साथ शुरू होती थी।

ऐसे में यदि कांग्रेस का कोई व्यक्ति कहता है कि उन्हें वंदे मातरम बोलने में समस्या है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि अब इंदौर में कांग्रेस के हर कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम के साथ होगी। हर कार्यक्रम का समापन जन गण मन के साथ होगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी को वंदे मातरम कहने में तकलीफ है तो वह कांग्रेस की मीटिंग में नहीं आएं। हमें यह याद रखना होगा कि धर्म की मान्यता से पहले राष्ट्र है और हमें राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए ही काम करना है। राजनीति राष्ट्र से ऊपर नहीं है।

राष्ट्रीयता का भाव रखना और उसे प्रकट करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म हमें अपने देश के सम्मान का गान करने से नहीं रोकता है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के प्रति कभी भी हमारे मन में या व्यवहार में असम्मान का भाव नहीं हो।

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