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एमडीएमए ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा: इतना केमिकल; इतने लाख नकद और कार जब्त, इतने आरोपी गिरफ्तार

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 अप्रैल 2026, 4:51 pm
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एमडीएमए ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की बड़ी साजिश का खुलासा किया है। चिमनगंज मंडी थाना पुलिस ने आगर रोड स्थित एक गैरेज पर छापा मारकर भारी मात्रा में केमिकल, नकदी और फर्जी दस्तावेज जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क के तार सामने आए हैं।

गैरेज में थी एमडीएमए ड्रग्स बनाने की तैयारी
पुलिस को 3 अप्रैल को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ‘कृष्णा मोटर्स’ नामक गैरेज में अवैध केमिकल्स जमा किए गए हैं, जिनका उपयोग एमडीएमए (सिंथेटिक ड्रग्स) बनाने में किया जाना था। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी अर्पित उर्फ सौरभ गुप्ता को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

गुजरात से मंगाए जा रहे थे प्रतिबंधित केमिकल
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी बिलिंग के जरिए गुजरात की कंपनियों से ‘ब्रोनोपोल’ और ‘2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपियोफेनोन’ जैसे केमिकल मंगवा रहे थे। इनका इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने में किया जाना था। आरोपी इन केमिकल्स को पेंट और कलर के काम के बहाने मंगाते थे।

कार्रवाई में क्या-क्या बरामद हुआ

पुलिस ने गैरेज से- 75 किलोग्राम ब्रोनोपोल क्रिस्टल पाउडर, 8.50 लाख नकद, तीन फर्जी बिल और एक बलेनो कार जब्त की है। हालांकि केमिकल की अनुमानित कीमत कम बताई जा रही है, लेकिन इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नशा बनाने में हो सकता था।

तीन आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
इस मामले में अर्पित उर्फ सौरभ गुप्ता (उज्जैन), रंजीत (मंदसौर) और ओमप्रकाश (आगर मालवा) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इनके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

झालावाड़ से जुड़े नेटवर्क के तार
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार राजस्थान के झालावाड़ से जुड़े हैं। आरोपी वहां के कुछ लोगों के संपर्क में थे और सप्लायर की भूमिका निभा रहे थे। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी सौरभ गुप्ता गैरेज में काम करता था और उसे इस काम में हाल ही में जोड़ा गया था।

दो गैरेज से चल रहा था खेल
पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी फ्रीगंज और आगर रोड क्षेत्र में दो गैरेज के जरिए इस नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। यहां केमिकल स्टोर कर आगे सप्लाई किया जाता था।

प्रतिबंध से पहले मंगाया गया था केमिकल
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि संबंधित केमिकल जनवरी 2026 में मंगवाया गया था, जबकि इस पर आधिकारिक प्रतिबंध 11 मार्च 2026 को लगाया गया। हालांकि, ऐसे केमिकल मंगवाने के लिए उपयोग से जुड़ा प्रमाण देना जरूरी होता है, लेकिन आरोपियों ने पेंट कार्य का बहाना बनाकर इसे हासिल किया।

पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई चिमनगंज मंडी थाना, साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने की है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से शहर में फैलने वाले बड़े नशा नेटवर्क को तोड़ने में सफलता मिली है।

आगे की जांच जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए ड्रग्स कहां सप्लाई की जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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